Putra Viyog Subjective Question
Putra viyog Subjective Question
आधारित पैटर्न | बिहार बोर्ड, पटना |
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कक्षा | 12 वीं |
संकाय | कला (I.A.), वाणिज्य (I.Com) & विज्ञान (I.Sc) |
विषय | हिन्दी (100 Marks) |
किताब | दिगंत भाग-2 |
प्रकार | प्रश्न-उत्तर |
अध्याय | पद्य-7 | पुत्र वियोग – सुभद्रा कुमारी चौहान |
कीमत | नि: शुल्क |
लिखने का माध्यम | हिन्दी |
उपलब्ध | NRB HINDI App पर उपलब्ध |
श्रेय (साभार) | रीतिका |
उत्तर
कवियित्री का खिलौना उनका पुत्र है। जिसकी मृत्यु हो चुकी है। Putra viyog Subjective Question
कवियित्री अपने पुत्र को बचाने के लिए बहुत से जगहों पर गई। पत्थर को भी भगवान माना और उनके सामने नारियल, दूध, बताशे आदि चढ़ाकर अपना शीश नवाया लेकिन किसी देवी-देवता ने उनके पुत्र की रक्षा नहीं की और वे भी कुछ नहीं कर पायी। अपने बेटे को नहीं बचा सकी
पुत्र के लिए माँ अपना सबकुछ छोड़ देती है। ठंड लग जाएगी, इस डर से वे अपने बेटे को अपने गोद से नीचे नहीं उतरती है। उसके एक बार पुकारने पर अपना सभी काम छोड़ दौड़ी आती है। लोरियाँ गाती है, थपकी देकर सुलाती है। माँ उन सभी कामों को करती है जिससे उसका बच्चा सुरक्षित रहे। वह पत्थर को भी भगवान मानती है, जब उसका बच्चा किसी खतरे में रहता है।
प्रस्तुत पंक्ति हमारे पाठ्यपुस्तक दिगंत भाग 2 के पुत्र वियोग कविता से ली गई है। यह मुकुल काव्य से संकलित है। इन पंक्तियों के द्वारा कवित्री सुभद्रा कुमारी चौहान जी कहते हैं कि, आज चारों दिशाओ मे, पूरे विश्व मे, खुशी है, उल्लास है। लेकिन मेरा खोया हुआ खिलौना, मेरा बेटा अभी तक मेरे पास नहीं आया है। Putra viyog Subjective Question
माँ के लिए अपना मन समझाना कठिन तब हो जाता है, जब उनके सामने उनके बच्चे की मृत्यु हो जाए क्योंकि माँ अपने बच्चे के साथ हर एक पल रहती है। माँ अपने बच्चे के लिए ही जीती है। उसके एक बार बुलाने पर वह दौड़ी चली आती है। Putra viyog Subjective Question
गाय के नवजात बच्चे को छौना कहा जाता है। छौना कहकर कवियित्री ने माँ और बच्चे के बीच के निश्चल प्रेम तथा माँ की ममता का भाव स्पष्ट किया है। Putra viyog Subjective Question
प्रस्तुत पंक्ति हमारे पाठ्यपुस्तक दिगंत भाग 2 के पुत्र वियोग कविता से ली गई है यह मुकुल काव्य से संकलित है इन पंक्तियों के द्वारा कवित्री सुभद्रा कुमारी चौहान जी कहते हैं कि, तुम्हारे भाई-बहन तुम्हें भूल सकते हैं, तुम्हारे पिता तुम्हें भूला सकते हैं लेकिन जो माँ तुम्हें नव महीने अपने गर्भ में पाली है, जो रात दिन तुम्हारे साथ रहती है, वह अपने मन को कैसे समझाए कि उसका बेटा मर चुका है।
पुत्र वियोग कविता मुकुल काव्य से संकलित है। जिसमें कवित्री सुभद्रा कुमारी चौहान एक माँ की पीड़ा को बताते हुए कहती हैं कि, जिसे हमेशा अपने सीने से लगा कर रखा है। जिसकी चेहरे पर जरा भी उदासी को देख मैं रात-रात भर सोती नहीं थी। जिसके लिए मैं ना जाने कितने सारे देवी-देवताओं को प्रसाद चढ़ाया है, उसके आगे अपना शीश नवाया है।
वह मुझसे दूर हो गया मैं उसे मैंने उसे खो दिया, मैं अपने मन को कैसे मनाऊ। उसके याद में मेरा हृदय तड़प रहा है। मुझे एक पल को भी शांति नहीं है। मेरा बेटा एक बार मेरे पास आ जाए तो, मैं उसे प्यार से समझाती कि उससे, उसके भाई-बहन भूल सकते हैं, उसे उसके पिता भूला सकते हैं लेकिन जो माँ उसे 9 महीने अपने गर्भ में पाली है, जो रात दिन उसके साथ रहती है वह अपने मन को कैसे समझाए कि उसका बेटा मर चुका है। वह कभी लौटकर नहीं आएगा बहुत कठिन है उसको समझाना।
इस कविता को पढ़कर माँ के गहन प्रेम का अनुभव होता है। माँ के लिए उसका बच्चा ही सब कुछ होता है। वह कभी भी अपने बच्चे को भुल नहीं सकती है। इस कविता को पढ़ने पर हमारे मन में माँ के प्रति और भी ज्यादा प्रेम तथा आदर की भावना जागृत हो गई है। Putra viyog Subjective Question
क. आज दिशाएँ भी हँसती हैं
है उल्लास विश्व पर छाया
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मेरा खोया हुआ खिलौना
अब तक मेरे पास न आया ।
ख. मेरे भैया, मेरे बेटे, अब
माँ को यों छोड़ न जाना
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बड़ा कठिन है बेटा खोकर
माँ को अपना मन समझना
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