har jit bhavarth (saransh)

पद्य-12 | हार-जीत भावार्थ (सारांश) – अशोक वाजपेयी | कक्षा-12 वीं | हिन्दी 100 मार्क्स

विवरण

har jit bhavarth (saransh)

आधारित पैटर्नबिहार बोर्ड, पटना
कक्षा12 वीं
संकायकला (I.A.), वाणिज्य (I.Com) & विज्ञान (I.Sc)
विषयहिन्दी (100 Marks)
किताबदिगंत भाग 2
प्रकारभावार्थ (सारांश)
अध्यायपद्य-12 | हार-जीत – अशोक वाजपेयी
कीमतनि: शुल्क
लिखने का माध्यमहिन्दी
उपलब्धNRB HINDI ऐप पर उपलब्ध
श्रेय (साभार)रीतिका
पद्य-12 | हार-जीत भावार्थ (सारांश) – अशोक वाजपेयी | कक्षा-12 वीं

हार-जीत

har jit bhavarth (saransh)

वे उत्सव मना रहे हैं। सारे शहर में रोशनी की जा रही है। उन्हें बताया गया है कि उनकी सेना और रथ विजय प्राप्त कर लौट रहे हैं। नागरिकों में से ज्यादातर को पता नहीं है कि किस युद्ध में उनकी सेना और शासक गए थे, युद्ध किस बात पर था । यह भी नहीं कि शत्रु कौन था पर वे विजयपर्व मनाने की तैयारी में व्यस्त हैं।

व्यख्या

प्रस्तुत पंक्ति हमारे पाठ्यपुस्तक दिगंत भाग 2 के “गद्य कविता” “हार जीत”

से ली गई है। इसके कवि अशोक वाजपेयी जी हैं। यह कविता अशोक वाजपेयी जी की कविता संकलन “कहीं नहीं वहीं” से ली गई है। इसमे कवि बताते है की हमारे देश की जो नेता है जो शासक वर्ग है वो भोली भाली जनता को बेवकूफ बनाते है। इसमें कवि कहते हैं कि, नागरिकों पता नहीं है कि, किस युद्ध में उनकी सेना और शासक (राजा) गए थे और  युद्ध किस बात पर था। वो यह भी नहीं कि शत्रु कौन था। उन्हे बस इतना बताया गया है, इतना पाता है की, उनकी सेना और रथ विजय प्राप्त कर लौट रहे हैं। जिसका वे उत्सव यानि विजयपर्व मना रहे हैं और उसकी तैयारी मे व्यस्त है। सारे शहर में रोशनी की जा रही है। अर्थात सारे शहर मे इस बात को फैलाया जा रहा है।


उन्हें सिर्फ इतना पता है कि उनकी विजय हुई। उनकी से आशय क्या है यह भी स्पष्ट नहीं है : किसकी विजय हुई सेना की, कि शासक की, कि नागरिकों की ? किसी के पास पूछने का अवकाश नहीं है ।

व्यख्या

प्रस्तुत पंक्ति हमारे पाठ्यपुस्तक दिगंत भाग 2 के “गद्य कविता” “हार जीत” से ली गई है। इसके कवि अशोक वाजपेयी जी हैं। यह कविता अशोक वाजपेयी जी की कविता संकलन “कहीं नहीं वहीं” से ली गई है। इसमे कवि बताते है की हमारे देश की जो नेता है जो शासक वर्ग है वो भोली भाली जनता को बेवकूफ बनाते है। इसमें कवि कहते हैं कि, किसकी विजय हुई है। शासक की या नागरिकों की ये भी पाता नहीं है। हमारे देश के जो नेता है, वो कभी अपनी हार नहीं मानती है वो जनता को हमेशा अंधेरे मे ही रखती है।और किसी ने यह जानने की कोशिश ही नहीं की। har jit bhavarth (saransh)


नागरिकों को नहीं पता कि कितने सैनिक गए थे और कितने विजयी वापस आ रहे हैं। खेत रहनेवालों की सूची अप्रकाशित है।

व्यख्या

प्रस्तुत पंक्ति हमारे पाठ्यपुस्तक दिगंत भाग 2 के “गद्य कविता” “हार जीत” से ली गई है। इसके कवि अशोक वाजपेयी जी हैं। यह कविता अशोक वाजपेयी जी की कविता संकलन “कहीं नहीं वहीं” से ली गई है। इसमे कवि बताते है की हमारे देश की जो नेता है जो शासक वर्ग है वो भोली भाली जनता को बेवकूफ बनाते है। इसमें कवि कहते हैं कि, नागरिकों को यह भी नहीं पता कि कितने सैनिक युद्ध के लिए गए थे और कितने विजयी होकर वापस आ रहे हैं। मरने वालों की सूची अप्रकाशित है। अर्थात अभी ये भी नहीं पाता है की कितने सैनिक मारे गए है। har jit bhavarth (saransh)


सिर्फ एक बूढ़ा मशकवाला है जो सड़कों को सींचते हुए कह रहा है कि हम एक बार फिर हार गए हैं और गाजे-बाजे के साथ जीत नहीं हार लौट रही है। उस पर कोई ध्यान नहीं देता है और अच्छा यह है कि उस पर सड़कें सींचने भर की जिम्मेवारी है, सच को दर्ज करने या बोलने की नहीं। जिन पर है वे सेना के साथ ही जीतकर लौट रहे हैं ।

व्यख्या

प्रस्तुत पंक्ति हमारे पाठ्यपुस्तक दिगंत भाग 2 के “गद्य कविता” “हार जीत” से ली गई है। इसके कवि अशोक वाजपेयी जी हैं। यह कविता अशोक वाजपेयी जी की कविता संकलन “कहीं नहीं वहीं” से ली गई है। इसमे कवि बताते है की हमारे देश की जो नेता है जो शासक वर्ग है वो भोली भाली जनता को बेवकूफ बनाते है। इसमें कवि कहते हैं कि, कवि कहते हैं कि, चमड़े के थैले में पानी रखने वाला रखने वाला सिर्फ वह बूढ़ा व्यक्ति है।

जो कह रहा है कि, हम जीते नहीं हैं। एक बार फिर हार गए हैं और गाने बजाने के साथ जीत नहीं हार लौट रही है। कवि कहते हैं कि, अच्छा है कि, उस बूढ़े व्यक्ति पर बस सड़क सींचने भर की जिम्मेवारी है। सच बोलने या दर्ज करने की नहीं क्योंकि जिन पर यह जिम्मेवारी है, वह शासकों के गुलाम है। उनके साथ जीत कर लौट रहे हैं। जीत का जश्न मना रहे हैं।


सारांश

व्यख्या 

प्रस्तुत कविता “हार जीत” कवि “अशोक वाजपेयी” के कविता संकलन “कहीं नहीं वहीं” से ली गई है।  और यह एक गद्य कविता है। यह कविता शासक वर्ग, राजनीति, युद्ध, इतिहास और आम आदमी को लेकर आधुनिक प्रसंगों मे अनेक प्रश्न उठती है। कवि कहते है कि, नागरिकों पाता ही नहीं है की, उनका राजा, उनका शासक कौन है? और उनका शत्रु कौन है? उन्हे बताया गया है की उनकी विजय हुई है। ये भी स्पष्ट पाता नहीं है की किसकी विजय हुई है, नागरिकों की या शासकों की। नागरिकों को यह भी नहीं पता कि कितने सैनिक युद्ध के लिए गए थे, और कितने विजयी होकर वापस आ रहे हैं। मरने वालों की सूची अप्रकाशित है। अर्थात अभी ये भी नहीं पाता है की कितने सैनिक मारे गए है। har jit bhavarth (saransh)

चमड़े के थैले में पानी रखने वाला रखने वाला सिर्फ वह बूढ़ा व्यक्ति है। जो कह रहा है कि, हम जीते नहीं हैं। एक बार फिर हार गए हैं और गाने बजाने के साथ जीत नहीं हार लौट रही है। कवि कहते हैं कि, अच्छा है कि, उस बूढ़े व्यक्ति पर बस सड़क सींचने भर की जिम्मेवारी है। सच बोलने या दर्ज करने की नहीं क्योंकि जिन पर यह जिम्मेवारी है, वह शासकों के गुलाम है। उनके साथ जीत कर लौट रहे हैं। जीत का जश्न मना रहे हैं।


Quick Link

Chapter Pdf
यह अभी उपलब्ध नहीं है लेकिन जल्द ही इसे publish किया जाएगा । बीच-बीच में वेबसाइट चेक करते रहें।
मुफ़्त
Online Test 
यह अभी उपलब्ध नहीं है लेकिन जल्द ही इसे publish किया जाएगा । बीच-बीच में वेबसाइट चेक करते रहें।
मुफ़्त
सारांश का पीडीएफ़
यह अभी उपलब्ध नहीं है लेकिन जल्द ही इसे publish किया जाएगा । बीच-बीच में वेबसाइट चेक करते रहें।
मुफ़्त

हिन्दी 100 मार्क्स सारांश

You may like this

Kadbak Subjective Question

पद्य-1 | कड़बक (प्रश्न-उत्तर) – मलिक मुहम्मद जायसी | कक्षा-12 वीं | हिन्दी 100 मार्क्स

कड़बक का प्रश्न-उत्तर पढ़ने के लिए ऊपर क्लिक करें। Q-1. कवि ने अपनी एक आँख की तुलना दर्पण से क्यों की है? उत्तर- कवि एक आँख से देखते है। उसके आधार पर कविता की रचना करते है। इसलिए उनकी आँखे उनका दर्पण है। कवि के …
Continue Reading…
Surdas ke pad Subjective Q & A

पद्य-2 | पद (प्रश्न-उत्तर) – सूरदास | कक्षा-12 वीं | हिन्दी 100 मार्क्स

सूरदास के पद का प्रश्न-उत्तर पढ़ने के लिए ऊपर क्लिक करें। Q-1. प्रथम पद में किस रस की व्यंजना हुई है ? उत्तर- प्रथम पद में बालक …
Continue Reading…
Tumul kolahal kalah me Subjective Q & A

पद्य-6 | तुमुल कोलाहल कलह में (प्रश्न-उत्तर) – जयशंकर प्रसाद | कक्षा-12 वीं | हिन्दी 100 मार्क्स

तुमुल कोलाहल कलह में का प्रश्न-उत्तर पढ़ने के लिए ऊपर क्लिक करें। हृदय की बात का क्या कार्य है ? उत्तर- जब हम अत्यधिक कोलाहल कलह अशांति और परेशानी में घिरे जाते हैं। उस …
Continue Reading…
usne kaha tha saransh

गद्य-2 | उसने कहा था सारांश – चंद्रधर शर्मा गुलेरी | कक्षा-12 वीं | हिन्दी 100 मार्क्स

“उसने कहा था” कहानी शीर्षक के लेखक चंद्रधर शर्मा गुलेरी जी हैं। यह कहानी पाँच भागों में बटी हुई है। यह कहानी अमृतसर के भीड़ …
Continue Reading…
Roj Objective Q & A

गद्य-5 | रोज Objective Q & A – सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन (अज्ञेय) | कक्षा-12 वीं | हिन्दी 100 मार्क्स

सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन (अज्ञेय) द्वारा रचित रोज पाठ का Objective Q & A पढ़ने के लिए ऊपर क्लिक करें। 1. रोज किसकी रचना है? (A) रामधारी सिंह …
Continue Reading…
Tirichh Objective Q & A

गद्य-12 | तिरिछ Objective Q & A – उदय प्रकाश | कक्षा-12 वीं | हिन्दी 100 मार्क्स

उदय प्रकाश द्वारा रचित तिरिछ पाठ का Objective Q & A पढ़ने के लिए ऊपर क्लिक करें। 1. तिरिछ किसकी रचना है? (A) उदय प्रकाश (B) जयप्रकाश नारायण (C) …
Continue Reading…

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!